
१४ अगस्ट २०२३
ने.सं. ११४३ गुंलागा चतुर्दशी
शक संवत् १९४५ (शोभकृत संवत्सर)
| वार | सोमवार |
मन कोमल र मायालु हुने। परिवार र आफ्ना मानिसप्रति गहिरो माया रहने र सम्बन्धमा शान्ति तथा आत्मीयता खोज्ने। | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
कृष्ण पक्ष (घट्दो चन्द्रमा) मा जन्म हुनाले, यसले आन्तरिक चिन्तन, विवेक, गम्भीरता र आत्मिक शक्तिलाई अनुकूल बनाउँछ। | |
| तिथि | ![]() |
कुल अवधि: २६ घण्टा १७ मिनेट चतुर्दशी तिथि सोमबार बिहान ४:५५ AM देखि मंगलबार बिहान ७:१२ AM सम्म तपाईंको जन्मको तिथिले तपाईंको भावनात्मक सम्बन्ध, साझेदारी र मानसिक अवस्थालाई मार्गनिर्देशन गर्दछ। | |
| नक्षत्र | पुष्य(१ पाउ) |
कुल अवधि: २६ घण्टा ५२ मिनेट पुष्य नक्षत्र सोमबार बिहान ५:३६ AM देखि मंगलबार बिहान ८:२८ AM सम्म पुष्य नक्षत्रका स्वामी शनि हुन् र यसका देवता बृहस्पति हुन्। यो नक्षत्रलाई सबैभन्दा कल्याणकारी र आध्यात्मिक कार्यका लागि शुभ मानिन्छ। १ पाउ बिहान ५:३६ AM देखि दिउँसो १२:१९ PM सम्म (हू)हालको पाउ २ पाउ दिउँसो १२:१९ PM देखि साँझ ७:०२ PM सम्म (हे) ३ पाउ सोमबार साँझ ७:०२ PM देखि मंगलबार राति १:४५ AM सम्म (हो) ४ पाउ राति १:४५ AM देखि बिहान ८:२८ AM सम्म (डा) | |
| योग | व्यतीपात |
कुल अवधि: २४ घण्टा ५३ मिनेट व्यतीपात योग सोमबार बिहान ११:०८ AM देखि मंगलबार दिउँसो १२:०१ PM सम्म सूर्य र चन्द्रमाको संयुक्त देशान्तरबाट निकालिने यो योगले तपाईंको स्वास्थ्य, समृद्धि र आपसी सम्बन्धलाई प्रभाव पार्छ। | |
| करण | विष्टि |
कुल अवधि: १३ घण्टा ८ मिनेट विष्टि करण सोमबार बिहान ४:५५ AM देखि सोमबार साँझ ६:०३ PM सम्म करणले तिथिको आधा भाग प्रतिनिधित्व गर्दछ, जसले तपाईंको कार्यक्षमता, कामप्रतिको दृष्टिकोण र व्यावसायिक झुकावलाई सङ्केत गर्छ। | |
| चन्द्र राशि | कर्कट |
कुल अवधि: ६० घण्टा २७ मिनेट कर्कट राशि आइतबार दिउँसो ३:२२ PM देखि बुधबार राति ३:४९ AM सम्म कर्कट राशिमा चन्द्रमा हुनाले, चन्द्रमाको प्रभावले तपाईंमा गहिरो संवेदनशीलता, दया, सहृदयता र पारिवारिक स्नेह रहन्छ। | |
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था | कारक | मर्यादा | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
लग्न | तुला | २०° ५३' ४६" | विशाखा(१)- बृहस्पति | -- | -- | -- | -- |
सूर्य | कर्कट | २७° ०२' ४३" | आश्लेषा(४)- बुध | बाल | अमात्यकारक | मित्रदिग्बली | मार्गी |
चन्द्र | कर्कट | ३° ३८' ५५" | पुष्य(१)- शनि | मृत | दारककारक | स्वराशि | मार्गीउदय |
मङ्गल🪷 | सिंह | २७° २१' ३३" | उत्तराफाल्गुनी(१)- सूर्य | मृत | आत्मकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
बुध | सिंह | २३° ५४' २०" | पूर्वाफाल्गुनी(४)- शुक्र | वृद्ध | मातृकारक | मित्र | मार्गीउदय |
बृहस्पति🪷 | मेष | २०° ३९' २३" | भरणी(३)- शुक्र | वृद्ध | पुत्रकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
शुक्र | कर्कट | २५° ४७' ३७" | आश्लेषा(३)- बुध | बाल | भ्रातृकारक | शत्रु | वक्रीअस्त |
शनि | कुम्भ | १०° ३७' ३६" | शतभिषा(२)- राहु | कुमार | ज्ञातिकारक | मूलत्रिकोण | वक्रीउदय |
राहु | मेष | ३° १०' १४" | अश्विनी(१)- केतु | बाल | -- | शत्रुवर्गोत्तमदिग्बली | वक्री |
केतु | तुला | ३° १०' १४" | चित्रा(३)- मङ्गल | बाल | -- | मित्रवर्गोत्तम | वक्री |