
१३ अगस्ट २०२३
ने.सं. ११४३ गुंलागा त्रयोदशी
शक संवत् १९४५ (शोभकृत संवत्सर)
| वार | आइतवार |
आत्मविश्वास बलियो हुने र आफ्नै निर्णयमा अघि बढ्ने। अरूलाई साथ लिएर नेतृत्व गर्न सक्ने र मनमा न्यानोपन रहने। | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
कृष्ण पक्ष (घट्दो चन्द्रमा) मा जन्म हुनाले, यसले आन्तरिक चिन्तन, विवेक, गम्भीरता र आत्मिक शक्तिलाई अनुकूल बनाउँछ। | |
| तिथि | ![]() |
कुल अवधि: २६ घण्टा ६ मिनेट त्रयोदशी तिथि आइतबार राति २:४९ AM देखि सोमबार बिहान ४:५५ AM सम्म तपाईंको जन्मको तिथिले तपाईंको भावनात्मक सम्बन्ध, साझेदारी र मानसिक अवस्थालाई मार्गनिर्देशन गर्दछ। | |
| नक्षत्र | पुनर्वसु(२ पाउ) |
कुल अवधि: २६ घण्टा ४० मिनेट पुनर्वसु नक्षत्र आइतबार राति २:५६ AM देखि सोमबार बिहान ५:३६ AM सम्म पुनर्वसु नक्षत्रका स्वामी बृहस्पति हुन् र यसकी देवी अदिति हुन्। यसले सकारात्मकता, नवजीवन र आध्यात्मिक पुनरुत्थानलाई जनाउँछ। १ पाउ राति २:५६ AM देखि बिहान ९:३६ AM सम्म (के) २ पाउ बिहान ९:३६ AM देखि साँझ ४:१६ PM सम्म (को)हालको पाउ ३ पाउ साँझ ४:१६ PM देखि राति १०:५६ PM सम्म (हा) ४ पाउ आइतबार राति १०:५६ PM देखि सोमबार बिहान ५:३६ AM सम्म (ही) | |
| योग | सिद्धि |
कुल अवधि: २४ घण्टा ४४ मिनेट सिद्धि योग आइतबार बिहान १०:२४ AM देखि सोमबार बिहान ११:०८ AM सम्म सूर्य र चन्द्रमाको संयुक्त देशान्तरबाट निकालिने यो योगले तपाईंको स्वास्थ्य, समृद्धि र आपसी सम्बन्धलाई प्रभाव पार्छ। | |
| करण | गरज |
कुल अवधि: १३ घण्टा १ मिनेट गरज करण आइतबार राति २:४९ AM देखि आइतबार दिउँसो ३:५० PM सम्म करणले तिथिको आधा भाग प्रतिनिधित्व गर्दछ, जसले तपाईंको कार्यक्षमता, कामप्रतिको दृष्टिकोण र व्यावसायिक झुकावलाई सङ्केत गर्छ। | |
| चन्द्र राशि | मिथुन |
कुल अवधि: ५९ घण्टा १५ मिनेट मिथुन राशि शुक्रबार बिहान ४:०८ AM देखि आइतबार दिउँसो ३:२२ PM सम्म मिथुन राशिमा चन्द्रमा हुनाले, बुध ग्रहले तपाईंलाई राम्रो अभिव्यक्ति क्षमता, जिज्ञासा र बौद्धिक क्षमता प्रदान गर्दछ। | |
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था | कारक | मर्यादा | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
लग्न | तुला | २०° ०३' ०१" | विशाखा(१)- बृहस्पति | -- | -- | -- | -- |
सूर्य | कर्कट | २६° ०५' ०६" | आश्लेषा(३)- बुध | बाल | भ्रातृकारक | मित्रदिग्बली | मार्गी |
चन्द्र | मिथुन | २१° ३९' ३६" | पुनर्वसु(१)- बृहस्पति | वृद्ध | पुत्रकारक | मित्र | मार्गीउदय |
मङ्गल🪷 | सिंह | २६° ४३' ४२" | उत्तराफाल्गुनी(१)- सूर्य | मृत | आत्मकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
बुध🪷 | सिंह | २३° ०८' ५६" | पूर्वाफाल्गुनी(३)- शुक्र | वृद्ध | मातृकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
बृहस्पति🪷 | मेष | २०° ३५' १२" | भरणी(३)- शुक्र | वृद्ध | ज्ञातिकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
शुक्र | कर्कट | २६° २४' ५४" | आश्लेषा(३)- बुध | बाल | अमात्यकारक | शत्रु | वक्रीअस्त |
शनि | कुम्भ | १०° ४१' ५६" | शतभिषा(२)- राहु | कुमार | दारककारक | मूलत्रिकोण | वक्रीउदय |
राहु | मेष | ३° २१' ०४" | अश्विनी(२)- केतु | बाल | -- | शत्रुदिग्बली | वक्री |
केतु | तुला | ३° २१' ०४" | चित्रा(४)- मङ्गल | बाल | -- | मित्र | वक्री |