
२७ अगस्ट २०२३
ने.सं. ११४३ ञंलाथ्व एकादशी
शक संवत् १९४५ (शोभकृत संवत्सर)
| वार | आइतवार |
आत्मविश्वास बलियो हुने र आफ्नै निर्णयमा अघि बढ्ने। अरूलाई साथ लिएर नेतृत्व गर्न सक्ने र मनमा न्यानोपन रहने। | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
शुक्ल पक्ष (बढ्दो चन्द्रमा) मा जन्म हुनाले, यसले बाह्य विकास, ऊर्जा वृद्धि, सकारात्मकता र प्रगतिको सङ्केत गर्दछ। | |
| तिथि | ![]() |
कुल अवधि: २१ घण्टा २४ मिनेट एकादशी तिथि शनिबार साँझ ६:३८ PM देखि आइतबार साँझ ४:०२ PM सम्म तपाईंको जन्मको तिथिले तपाईंको भावनात्मक सम्बन्ध, साझेदारी र मानसिक अवस्थालाई मार्गनिर्देशन गर्दछ। | |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढा२ पाउ |
कुल अवधि: २१ घण्टा ५९ मिनेट पूर्वाषाढा नक्षत्र आइतबार राति १:४५ AM देखि आइतबार राति ११:४५ PM सम्म तपाईंको जन्म नक्षत्र तपाईंको कुण्डलीको सबैभन्दा महत्त्वपूर्ण नक्षत्र हो, जसले तपाईंको गहिरो सोच, व्यक्तित्व र जीवन मार्गलाई आकार दिन्छ। १ पाउ राति १:४५ AM देखि बिहान ७:१५ AM सम्म (भू) २ पाउ बिहान ७:१५ AM देखि दिउँसो १२:४५ PM सम्म (धा)हालको पाउ ३ पाउ दिउँसो १२:४५ PM देखि साँझ ६:१५ PM सम्म (फा) ४ पाउ साँझ ६:१५ PM देखि राति ११:४५ PM सम्म (ढा) | |
| योग | आयुष्मान |
कुल अवधि: २० घण्टा ३० मिनेट आयुष्मान योग आइतबार बिहान ७:५५ AM देखि सोमबार बिहान ४:२४ AM सम्म सूर्य र चन्द्रमाको संयुक्त देशान्तरबाट निकालिने यो योगले तपाईंको स्वास्थ्य, समृद्धि र आपसी सम्बन्धलाई प्रभाव पार्छ। | |
| करण | विष्टि |
कुल अवधि: १० घण्टा ३७ मिनेट विष्टि करण आइतबार बिहान ५:२५ AM देखि आइतबार साँझ ४:०२ PM सम्म करणले तिथिको आधा भाग प्रतिनिधित्व गर्दछ, जसले तपाईंको कार्यक्षमता, कामप्रतिको दृष्टिकोण र व्यावसायिक झुकावलाई सङ्केत गर्छ। | |
| चन्द्र राशि | धनु |
कुल अवधि: ५० घण्टा २७ मिनेट धनु राशि शुक्रबार साँझ ८:३५ PM देखि आइतबार राति ११:०२ PM सम्म धनु राशिमा चन्द्रमा हुनाले, देवगुरु बृहस्पतिको कृपाले तपाईंलाई सकारात्मक सोच, दार्शनिक दृष्टिकोण र ज्ञान प्राप्तिको अभिलाषा दिन्छ। | |
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था | कारक | मर्यादा | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
लग्न | वृश्चिक | १° ५१' २४" | विशाखा(४)- बृहस्पति | -- | -- | -- | -- |
सूर्य | सिंह | ९° ३३' ३६" | मघा(३)- केतु | कुमार | ज्ञातिकारक | मूलत्रिकोणदिग्बली | मार्गी |
चन्द्र | धनु | १६° ०१' १८" | पूर्वाषाढा(१)- शुक्र | युवा | मातृकारक | सम | मार्गीउदय |
मङ्गल | कन्या | ५° ३७' ३१" | उत्तराफाल्गुनी(३)- सूर्य | मृत | दारककारक | शत्रु | मार्गीउदय |
बुध🪷 | सिंह | २७° ०५' ५१" | उत्तराफाल्गुनी(१)- सूर्य | मृत | आत्मकारक | मित्रपुष्कर | वक्रीउदय |
बृहस्पति🪷 | मेष | २१° १६' ५४" | भरणी(३)- शुक्र | वृद्ध | अमात्यकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
शुक्र | कर्कट | १९° १४' ०२" | आश्लेषा(१)- बुध | कुमार | भ्रातृकारक | शत्रु | वक्रीउदय |
शनि | कुम्भ | ९° ३९' २२" | शतभिषा(१)- राहु | कुमार | पुत्रकारक | मूलत्रिकोण | वक्रीउदय |
राहु | मेष | २° ०८' १०" | अश्विनी(१)- केतु | बाल | -- | शत्रुवर्गोत्तम | वक्री |
केतु | तुला | २° ०८' १०" | चित्रा(३)- मङ्गल | बाल | -- | मित्रवर्गोत्तम | वक्री |