
२० अगस्ट २०२३
ने.सं. ११४३ ञंलाथ्व चतुर्थी
शक संवत् १९४५ (शोभकृत संवत्सर)
| वार | आइतवार |
आत्मविश्वास बलियो हुने र आफ्नै निर्णयमा अघि बढ्ने। अरूलाई साथ लिएर नेतृत्व गर्न सक्ने र मनमा न्यानोपन रहने। | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
शुक्ल पक्ष (बढ्दो चन्द्रमा) मा जन्म हुनाले, यसले बाह्य विकास, ऊर्जा वृद्धि, सकारात्मकता र प्रगतिको सङ्केत गर्दछ। | |
| तिथि | ![]() |
कुल अवधि: २६ घण्टा २ मिनेट चतुर्थी तिथि शनिबार साँझ ४:४९ PM देखि आइतबार साँझ ६:५२ PM सम्म तपाईंको जन्मको तिथिले तपाईंको भावनात्मक सम्बन्ध, साझेदारी र मानसिक अवस्थालाई मार्गनिर्देशन गर्दछ। | |
| नक्षत्र | हस्त३ पाउ |
कुल अवधि: २६ घण्टा ३४ मिनेट हस्त नक्षत्र शनिबार साँझ ८:१७ PM देखि आइतबार राति १०:५१ PM सम्म हस्त नक्षत्रका स्वामी चन्द्रमा हुन् र यसका देवता सविता हुन्। यो नक्षत्र हस्तकला, सीप र मानसिक चतुरताको प्रतीक हो। १ पाउ शनिबार साँझ ८:१७ PM देखि आइतबार राति २:५५ AM सम्म (पू) २ पाउ राति २:५५ AM देखि बिहान ९:३४ AM सम्म (ष) ३ पाउ बिहान ९:३४ AM देखि साँझ ४:१३ PM सम्म (ण)हालको पाउ ४ पाउ साँझ ४:१३ PM देखि राति १०:५१ PM सम्म (ठ) | |
| योग | साध्य |
कुल अवधि: २४ घण्टा ४० मिनेट साध्य योग शनिबार दिउँसो ३:४७ PM देखि आइतबार साँझ ४:२७ PM सम्म सूर्य र चन्द्रमाको संयुक्त देशान्तरबाट निकालिने यो योगले तपाईंको स्वास्थ्य, समृद्धि र आपसी सम्बन्धलाई प्रभाव पार्छ। | |
| करण | विष्टि |
कुल अवधि: १२ घण्टा ५९ मिनेट विष्टि करण आइतबार बिहान ५:५३ AM देखि आइतबार साँझ ६:५२ PM सम्म करणले तिथिको आधा भाग प्रतिनिधित्व गर्दछ, जसले तपाईंको कार्यक्षमता, कामप्रतिको दृष्टिकोण र व्यावसायिक झुकावलाई सङ्केत गर्छ। | |
| चन्द्र राशि | कन्या |
कुल अवधि: ६० घण्टा १ मिनेट कन्या राशि शुक्रबार साँझ ४:३४ PM देखि सोमबार बिहान ४:३५ AM सम्म कन्या राशिमा चन्द्रमा हुनाले, बुध ग्रहले तपाईंलाई विश्लेषणात्मक बुद्धि, व्यावहारिक सोच, कर्तव्यपरायणता र सूक्ष्म कुराहरूमा ध्यान दिने बानी दिन्छ। | |
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था | कारक | मर्यादा | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
लग्न | तुला | २५° ५७' ३९" | विशाखा(२)- बृहस्पति | -- | -- | -- | -- |
सूर्य | सिंह | २° ४८' ५१" | मघा(१)- केतु | बाल | ज्ञातिकारक | मूलत्रिकोण | मार्गी |
चन्द्र🪷 | कन्या | १४° ५८' ३९" | हस्त(२)- चन्द्र | युवा | मातृकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
मङ्गल | कन्या | १° ०९' ३५" | उत्तराफाल्गुनी(२)- सूर्य | मृत | दारककारक | शत्रु | मार्गीउदय |
बुध🪷 | सिंह | २७° ०५' ३७" | उत्तराफाल्गुनी(१)- सूर्य | मृत | आत्मकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
बृहस्पति🪷 | मेष | २१° ००' ४०" | भरणी(३)- शुक्र | वृद्ध | भ्रातृकारक | मित्रपुष्कर | मार्गीउदय |
शुक्र | कर्कट | २२° १५' २४" | आश्लेषा(२)- बुध | कुमार | अमात्यकारक | शत्रु | वक्रीउदय |
शनि | कुम्भ | १०° ११' ०३" | शतभिषा(२)- राहु | कुमार | पुत्रकारक | मूलत्रिकोण | वक्रीउदय |
राहु | मेष | २° १५' ३८" | अश्विनी(१)- केतु | बाल | -- | शत्रुवर्गोत्तमदिग्बली | वक्री |
केतु | तुला | २° १५' ३८" | चित्रा(३)- मङ्गल | बाल | -- | मित्रवर्गोत्तम | वक्री |