
३० नोभेम्बर २०२७
ने.सं. ११४८ थिंलाथ्व तृतीया
शक संवत् १९४९ (प्लवङ्ग संवत्सर)
| वार | सोमवार |
मन कोमल र मायालु हुने। परिवार र आफ्ना मानिसप्रति गहिरो माया रहने र सम्बन्धमा शान्ति तथा आत्मीयता खोज्ने। | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
शुक्ल पक्ष (बढ्दो चन्द्रमा) मा जन्म हुनाले, यसले बाह्य विकास, ऊर्जा वृद्धि, सकारात्मकता र प्रगतिको सङ्केत गर्दछ। | |
| तिथि | ![]() |
कुल अवधि: २५ घण्टा ३१ मिनेट तृतीया तिथि मंगलबार बिहान ४:३८ AM देखि बुधबार बिहान ६:०९ AM सम्म तपाईंको जन्मको तिथिले तपाईंको भावनात्मक सम्बन्ध, साझेदारी र मानसिक अवस्थालाई मार्गनिर्देशन गर्दछ। | |
| नक्षत्र | मूला४ पाउ |
कुल अवधि: २५ घण्टा ४२ मिनेट मूला नक्षत्र सोमबार दिउँसो २:१७ PM देखि मंगलबार दिउँसो ३:५९ PM सम्म मूल नक्षत्रका स्वामी केतु हुन् र यसकी देवी निरृति हुन्। यसले अनुसन्धान, जरासम्म पुग्ने र सत्यको खोजलाई बुझाउँछ। १ पाउ दिउँसो २:१७ PM देखि साँझ ८:४२ PM सम्म (ये) २ पाउ सोमबार साँझ ८:४२ PM देखि मंगलबार राति ३:०८ AM सम्म (यो) ३ पाउ राति ३:०८ AM देखि बिहान ९:३४ AM सम्म (भा) ४ पाउ बिहान ९:३४ AM देखि दिउँसो ३:५९ PM सम्म (भी)हालको पाउ | |
| योग | शूल |
कुल अवधि: २३ घण्टा ५३ मिनेट शूल योग सोमबार साँझ ८:५८ PM देखि मंगलबार साँझ ८:५१ PM सम्म सूर्य र चन्द्रमाको संयुक्त देशान्तरबाट निकालिने यो योगले तपाईंको स्वास्थ्य, समृद्धि र आपसी सम्बन्धलाई प्रभाव पार्छ। | |
| करण | तैतिल |
कुल अवधि: १२ घण्टा ४१ मिनेट तैतिल करण मंगलबार बिहान ४:३८ AM देखि मंगलबार साँझ ५:१९ PM सम्म करणले तिथिको आधा भाग प्रतिनिधित्व गर्दछ, जसले तपाईंको कार्यक्षमता, कामप्रतिको दृष्टिकोण र व्यावसायिक झुकावलाई सङ्केत गर्छ। | |
| चन्द्र राशि | धनु |
कुल अवधि: ५८ घण्टा १६ मिनेट धनु राशि सोमबार बिहान ७:०७ AM देखि बुधबार साँझ ५:२३ PM सम्म धनु राशिमा चन्द्रमा हुनाले, देवगुरु बृहस्पतिको कृपाले तपाईंलाई सकारात्मक सोच, दार्शनिक दृष्टिकोण र ज्ञान प्राप्तिको अभिलाषा दिन्छ। | |
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था | कारक | मर्यादा | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
लग्न | कुम्भ | ५° २६' ५३" | धनिष्ठा(४)- मङ्गल | -- | -- | -- | -- |
सूर्य | वृश्चिक | १३° ३२' ५६" | अनुराधा(४)- शनि | युवा | अमात्यकारक | मित्रवर्गोत्तमदिग्बली | मार्गी |
चन्द्र | धनु | ८° १८' ४३" | मूला(३)- केतु | कुमार | पुत्रकारक | सम | मार्गीउदय |
मङ्गल | धनु | ९° ०९' ००" | मूला(३)- केतु | कुमार | मातृकारक | मित्र | मार्गीउदय |
बुध🪷 | वृश्चिक | ७° ०३' १३" | अनुराधा(२)- शनि | वृद्ध | ज्ञातिकारक | समपुष्कर | मार्गीअस्त |
बृहस्पति | कन्या | ०° २८' ११" | उत्तराफाल्गुनी(२)- सूर्य | मृत | दारककारक | शत्रु | मार्गीउदय |
शुक्र | धनु | ११° ३८' ४७" | मूला(४)- केतु | कुमार | भ्रातृकारक | सम | मार्गीउदय |
शनि | मीन | २७° १६' ५५" | रेवती(४)- बुध | बाल | आत्मकारक | समवर्गोत्तम | वक्रीउदय |
राहु🪷 | मकर | ९° २५' ३९" | उत्तराषाढा(४)- सूर्य | वृद्ध | -- | मित्रपुष्कर | वक्री |
केतु🪷 | कर्कट | ९° २५' ३९" | पुष्य(२)- शनि | वृद्ध | -- | शत्रुपुष्कर | वक्री |