
२७ नोभेम्बर २०२७
ने.सं. ११४८ थिंलागा अमावस्या
शक संवत् १९४९ (प्लवङ्ग संवत्सर)
| वार | शुक्रवार |
मायालु र मिलनसार हुने। कला, सौन्दर्य र राम्रा कुराप्रति रुचि रहने तथा सम्बन्धमा मेलमिलापलाई महत्व दिने। | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
कृष्ण पक्ष (घट्दो चन्द्रमा) मा जन्म हुनाले, यसले आन्तरिक चिन्तन, विवेक, गम्भीरता र आत्मिक शक्तिलाई अनुकूल बनाउँछ। | |
| तिथि | ![]() |
कुल अवधि: २३ घण्टा ४७ मिनेट अमावस्या तिथि शनिबार राति ३:३७ AM देखि आइतबार राति ३:२३ AM सम्म अमावश्या (औंसी) तिथिका स्वामी पितृहरू हुन्। यो दिन पितृ कार्य, तर्पण, दान र ध्यानका लागि समर्पित छ। नयाँ भौतिक कार्य सुरु गर्न यस दिन निषेध गरिन्छ। | |
| नक्षत्र | विशाखा४ पाउ |
कुल अवधि: २४ घण्टा ६ मिनेट विशाखा नक्षत्र शुक्रबार दिउँसो १२:२९ PM देखि शनिबार दिउँसो १२:३५ PM सम्म विशाखा नक्षत्रका स्वामी बृहस्पति हुन् र यसका देवता इन्द्राग्नि हुन्। यसले विजय, कडा मिहिनेत र लक्ष्य प्राप्तिको प्रतिनिधित्व गर्दछ। १ पाउ दिउँसो १२:२९ PM देखि साँझ ६:३० PM सम्म (ती) २ पाउ शुक्रबार साँझ ६:३० PM देखि शनिबार राति १२:३२ AM सम्म (तू) ३ पाउ राति १२:३२ AM देखि बिहान ६:३३ AM सम्म (ते) ४ पाउ बिहान ६:३३ AM देखि दिउँसो १२:३५ PM सम्म (तो)हालको पाउ | |
| योग | अतिगण्ड |
कुल अवधि: २२ घण्टा ३४ मिनेट अतिगण्ड योग शनिबार राति १२:०१ AM देखि शनिबार राति १०:३५ PM सम्म सूर्य र चन्द्रमाको संयुक्त देशान्तरबाट निकालिने यो योगले तपाईंको स्वास्थ्य, समृद्धि र आपसी सम्बन्धलाई प्रभाव पार्छ। | |
| करण | चतुष्पद |
कुल अवधि: ११ घण्टा ५० मिनेट चतुष्पद करण शनिबार राति ३:३७ AM देखि शनिबार दिउँसो ३:२६ PM सम्म करणले तिथिको आधा भाग प्रतिनिधित्व गर्दछ, जसले तपाईंको कार्यक्षमता, कामप्रतिको दृष्टिकोण र व्यावसायिक झुकावलाई सङ्केत गर्छ। | |
| चन्द्र राशि | वृश्चिक |
कुल अवधि: ५५ घण्टा २६ मिनेट वृश्चिक राशि शुक्रबार राति ११:४१ PM देखि सोमबार बिहान ७:०७ AM सम्म वृश्चिक राशिमा चन्द्रमा हुनाले, मङ्गल र केतुको प्रभावले तपाईंमा गहिरो अन्तर्ज्ञान, दृढ इच्छाशक्ति र रहस्यहरू बुझ्ने क्षमता रहन्छ। | |
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था | कारक | मर्यादा | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
लग्न | कुम्भ | १° ३६' ३०" | धनिष्ठा(३)- मङ्गल | -- | -- | -- | -- |
सूर्य | वृश्चिक | १०° ३०' ३७" | अनुराधा(३)- शनि | वृद्ध | भ्रातृकारक | मित्रदिग्बली | मार्गी |
चन्द्र | तुला | २९° ५०' ४७" | विशाखा(३)- बृहस्पति | मृत | आत्मकारक | सम | मार्गीअस्त |
मङ्गल | धनु | ६° ५२' २३" | मूला(३)- केतु | कुमार | पुत्रकारक | मित्र | मार्गीउदय |
बुध🪷 | वृश्चिक | २° १९' १६" | विशाखा(४)- बृहस्पति | मृत | ज्ञातिकारक | समपुष्कर | मार्गीअस्त |
बृहस्पति | कन्या | ०° ०५' ३२" | उत्तराफाल्गुनी(२)- सूर्य | मृत | दारककारक | शत्रु | मार्गीउदय |
शुक्र | धनु | ७° ५५' ५२" | मूला(३)- केतु | कुमार | मातृकारक | सम | मार्गीउदय |
शनि | मीन | २७° २४' ५३" | रेवती(४)- बुध | बाल | अमात्यकारक | समवर्गोत्तम | वक्रीउदय |
राहु🪷 | मकर | ९° ५२' ०३" | उत्तराषाढा(४)- सूर्य | वृद्ध | -- | मित्रपुष्कर | वक्री |
केतु🪷 | कर्कट | ९° ५२' ०३" | पुष्य(२)- शनि | वृद्ध | -- | शत्रुपुष्कर | वक्री |