
४ फेब्रुअरी २०२६
ने.सं. ११४६ सिल्लागा तृतीया
शक संवत् १९४७ (विश्ववासु संवत्सर)
पञ्चक छैन
अग्निवास पृथ्वी (शुभ)
अयन: उत्तरायण
चन्द्रकला: ९२.१% प्रकाश (कृष्ण पक्ष (१५ कला - चन्द्रकला क्षय))
सूर्योदय: ६:५० AM, सूर्यास्त: ५:४७ PM
दिनमान: १० घण्टा ५७ मिनेट (२७ घटी २३ पला), रात्रिमान: १३ घण्टा २ मिनेट (३२ घटी ३६ पला)
चन्द्रोदय: बुधबार दिउँसो २:३४ PM, चन्द्रास्त: बुधबार राति २:३० AM
ग्रह स्थिति, D1/D9 वर्ग चक्र र षड्बल फल
विस्तृत तिथि, नक्षत्र, चौघडिया र होरा मुहूर्त
परम्परागत नेपाली चिना, ग्रह चक्र र महादशा
प्रत्यक्ष आकाशीय ग्रहहरूको राशि, अंश, नक्षत्र, अवस्था, कारक, मर्यादा (उच्च/नीच/वर्गोत्तम) र उदयास्त स्थिति
| ग्रह (Planet) | राशि (Sign) | अंश (Degree) | नक्षत्र (पाउ) - स्वामी | अवस्था (Awastha) | कारक (Karaka) | मर्यादा (Dignity) | स्थिति (Condition) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
🌅लग्न | वृष(२) | २° १३' | कृत्तिका(२)-सूर्य | मृत | -- | लग्न बिन्दु | मार्गी (D) |
☀️सूर्य | मकर(१०) | २१° १२' | श्रवण(४)-चन्द्र | कुमार | BK(भ्रातृ) | शत्रु | मार्गी (D) |
🌙चन्द्र🪷 | सिंह(५) | २०° ५४' | पूर्वाफाल्गुनी(३)-शुक्र | वृद्ध | MK(मातृ) | मित्रपुष्करदिग्बली | मार्गी (D)उदय |
♂️मङ्गल🪷 | मकर(१०) | १५° ३' | श्रवण(२)-चन्द्र | युवा | PK(पुत्र) | उच्चपुष्कर | मार्गी (D)अस्त |
☿️बुध | कुम्भ(११) | १° १' | धनिष्ठा(३)-मङ्गल | बाल | DK(दारक) | सम | मार्गी (D)अस्त |
♃बृहस्पति | मिथुन(३) | २२° ४७' | पुनर्वसु(१)-बृहस्पति | वृद्ध | AmK(अमात्य) | शत्रु | वक्री (R)उदय |
♀️शुक्र | मकर(१०) | २८° २' | धनिष्ठा(२)-मङ्गल | बाल | AK(आत्म) | मित्र | मार्गी (D)अस्त |
🪐शनि | मीन(१२) | ४° ४४' | उत्तरभाद्रपदा(१)-शनि | मृत | GK(ज्ञाति) | सम | मार्गी (D)उदय |
☊राहु | कुम्भ(११) | १४° ४८' | शतभिषा(३)-राहु | युवा | -- | मित्रवर्गोत्तम | मार्गी (D) |
☋केतु | सिंह(५) | १४° ४८' | पूर्वाफाल्गुनी(१)-शुक्र | युवा | -- | शत्रुवर्गोत्तम | मार्गी (D) |
तृतीया तिथिकी स्वामिनी देवी गौरी हुन्। यस दिन गरिएका सत्कर्मको फल अक्षय रहने धार्मिक विश्वास छ। यो तिथि सुख, समृद्धि र दाम्पत्य जीवनको शुभ फल प्राप्तिका लागि प्रसिद्ध छ।